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हस्त साुद्रीक शास्त्र के व्यवसायमें मैनें आजतक हजारो हाथ देखे। इनमें से कुछ हाथ मुझे अलगसे लगे। ऐसे हाथ का नमुना परिक्षण इसप्रकार:

नमुना हाथ का परिक्षण

हस्त साुद्रीक शास्त्र के व्यवसायमें मैनें आजतक हजारो हाथ देखे। इनमें से कुछ हाथ मुझे अलगसे लगे। ऐसे हाथ का नमुना परिक्षण इसप्रकार:

  • अनेक लोगोके जीवनमें विस्मयकारी बदलाव होते हैं। स्कुलमें ‘ढ’ रहे छात्र अपने पसंदीदा क्षेत्रमें जानेपर नेत्रदिपक सफलता हासिल करता हैं ; तथा कक्षामें हमेशा प्रथम आनेवाला छात्र भविष्यमें केवल लिखापढी और नियमित मिलनेवाले वेतनेमं समाधान मानता हैं। सब्जी बेचनेंवाला मंत्री होता है, लोक कलाकार विधायक हो जाता हैं, एक कुली बडा स्मगलर हो जाता हैं, जिसे पूरी मुंबई डरती हैं। अध्यात्म को नोटंकी बनाकर लाखो लोगोको दिवाना बनानेवाले मालामाल हो जाते हैं, यह हम नित्य देखते हैं। जवानीमें अपने सौंदर्यसे घायल करनेंवाली मादक अभिनेत्री को दस सालबाद कोई याद भी नहीं करता; बल्की वे बस अथवा रेल के डिब्बेमें सफर करती देखी जाती हैं। ऊस समय ऊन्हे किसीद्वारा पहचान पाना भी मुश्किल होता हैं। जिसका ना चर्चा में नहीं और कभी मुख्यमंत्री या केबिनेट मंत्री की कुर्सीभी जिसने संभाली नहीं, ऐसी स्त्री भी देश की राष्ट्रपति बन जाती हैं। अगर सभी बाते मनुष्य के आधीन होती, तो ऐसी आश्चर्यकारक घटनाएँ कभी होती ही नहीं। ऐसी घटनाओंके पिछे कर्म की आजादी और मर्यादाका का बिचार अपरिहार्य होता हैं। कर्म करनेपर भी असफलता मिली, कर्म ना करनेंपर भी सफलता मिली, तो ऐसे लगता हैं, जैसे केवल नसिब ही सत्य है, कर्म नहीं; किन्तु यह चक्र ऊलटा भी हो सकता हैं। सौंदर्या नामक (बदला हुआ नाम) अभिनेत्री जिसने एक- दो फिलमें में रसिको के जितनेंपर अचानक ऊसकी मृत्यू हो गई। ऊसका हाथ यहाँ दिया गया हैं।

  • A] यह हाथ कुछ-कुछ शंकुरूप प्रकार का हैं। यह हाथ कलाप्रिय स्वभाव, दिखनेें सुंदर और कला के क्षेत्र में अश्टपैलु वृत्ति दर्शाता हैं। आयुष्य रेखा और मस्तक रेखा इनें प्रारंभमें अंतर, इसें से अतिरिक्त (ज्यादा) आत्मविश्वास, मुर्खता, ऊच्छृंखलता, अन्य लिंग के व्यक्तीसे विशेष आकर्षण इन बातोंका का ज्ञान होता हैं। भाग्य रेखा का ऊद्गम आयुष्य रेखा से, अर्थात् ऐसी व्यक्ती स्वयं का भविष्य स्वयं ही बनाती हैं। बचपनें वह अच्छा गाती थी; किंन्तु आवाज का स्तर बिगड जानेसे वह अभिनय और नृत्य की ओर मुड गयी। हाथपर स्थित आयुष्य रेखापर अंदर की ओर ‘यव’ चिन्ह जिससे हमेशा स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें।

  • B] ऊम्र के 19, 20, 21 साल प्रगतीकारक दर्शते हैं। कलों प्रगती होगी (इन सालोमी ऊसने रंगंचपर अभिनय और नृत्य पेश किये)

  • C] ऊम्र का 23 वां साल स्थलांतर दर्शाता हैं (23 साल की ऊम्र में ही वह मुंबईमें आयी) इस काल से सिधी मस्तक रेखानें ऊसके कलासक्त स्वभावपर नियंत्रण रखा तथा ऊसे व्यवहारी बनाया।

  • D] 24 साल की ऊम्र में विवाहयोग , विवाहरेखामें दोष, वैवाहिक सुख नहीं और ऊम्र के 25वे सालमें तलाक।

  • E] ऊम्र 25 साल, अचानक भाग्यदोय (इसी कालें भाग्य रेखासे एक रेखा रवीपर जाती हैं) समाजमें नाम, पैसा, वैभव आदी योग।

  • F] ऊम्र 26, 27 साल ऊत भाग्यदायक काल, अच्छी घटनाएँ होगी। 28, 29 साल की ऊम्रमें अधोगति (अवनती)। स्वयं के ही गलत निर्णयसे सबकुछ न होने का योग (इसी काल में ऊसने दुसरीबार शादी की। इसी कालमें भाग्य रेखासे प्रभावरेखा जुडी हैं) ऊसका यह विवाह सफल सिद्ध नहीं हुआ। क्योकि अंतःरेखासे निचे की ओर अनेक अर्धगोलाकार रेखाएँ देखी जाती हैं। वासना रेखा, जिससे बुरी आदतो का शिकार होगी । ऊम्र के 30, 31, 32 साल अत्यंत सामान्य जीवन। पागलपण के दौरे पडना (मस्तक रेखों ‘यव’ चिन्ह) राहमें यहाँ-वहाँ भटकना इस प्रकार के योग । इसी महिला को अपने अंतीम कालमें देह विक्रय भी करना पडा। (यह रूपवती सरकारी अस्पताल के बाह्य रूग्ण विभागमें इलाज के चलते चल बसीं। तब ऊसे लावारिस जानकर ऊसकी लाश के धकेलगाडीद्वारा ले जाया गया। यह बात अखबारें छपी दो लाईनसे पता चलती हैं।)
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आनेवाली घटनाको महसूस करानेवाला शास्त्र
  • ‘नर सोचे एक, दैव सोचे दुजा’ ऐसा हर एक का कारोबार के  बारे में खटपट करते हुए अनुभव आता है। ज्यादातर पढा हुआ आदी मामूली कारकूनी करता है, वही ‘ढ’ मतलब कम शिक्षा किया हुआ आदमी बँक चलाता है। सायन्स की पदवी लेकर अंगूठा छाप निचे रायटर होता है, रेकॉर्डकिपर होता है। स्पर्धा परीक्षा में सफल होकर उच्चांक प्राप्त करनेवाला हुशार व्यक्ती पिछे रहता है, वही वशिलेबाज उसका वरिष्ठ अफसर बनकर आता है। वशिलेबाजी बडी परीक्षा रहती है, वशिला याने बढती की प्रॉमोसरी नोट । साहित्य के क्षेत्र बडी बडे खिताब प्राप्त करने वाला मिलिटरी के अकाउंटमें अप्पर डिव्हीजन क्लार्क बनता है । क्या यह सही है? क्या इसे अन्याय कहे? तो  पढाई क्या  करे? मातापिता को  लगता है की इंजिनिअर बने, लडका कहता है मै डॉक्टर बनूंगा। परीक्षा में जैसे तैसे सफल होकर मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलने इतना उसका भाग्य खुलता है। उसे लगभग एक साल होने के  बाद थोड़ा  पिछे की ओर बी.एस्सी. की क्लास मे आता है। बाद में अलग अलग कोर्सेस पढना शुरू किया। मगर कुछ खास नही कर पाया। बाद में आसान ऐसा घर बैठे होमीयोपॅथी का अभ्यास करना शुरू किया और खत्म) दवाखानाही नही चला। खेती भी नही र्सिफ पुरखोरखा हुआ भाडा यही उसका उत्पन्न का साधन रहा। मन का अहंकार उसे कुछ करने नही देता था । पत्नी का और बच्चो का  इन चत्कारी महाशय के  साथ बनती नही थी। फिर करनी, जादूटोणा आदी। अपने संसार दो  टुकडे पडे । दुसरा उदाहरण के  तौर  पर आखरी फल कहके  बच्चे का लाड-प्यार, हठ पुरा करके बिगडा हुआ लडका रोटी चबाते वक्त लाखोकी बाते करता था। शिक्षा के नाम  पर 9 वी कक्षा में अनुत्तीर्ण  होतेही हमेशा के लिए छुट्टी की घंटा बजाई। मेरे मार्गदर्शन के  अनुसार उस लडके  को  पिताजी ने 10 वी कक्षा बिठाकर नॉन मॅट्रीक का ठप्पा लगा लिया । इस ठप्पा को  महत्त्व  है । इसके  बाद उसक¨ मोटार मेकॅनिक कोर्स की पढाई शुरू की गयी। कोर्स पुरा करके   दो-तीन साल नोकरी करने के बाद उसका खुदका बडा गॅरेज है। आज  रोजीरोटी के  तौर  पर महिने में दोन-तीन लाख रुपया उसका उत्पन्न उसके  शिक्षा से ज्यादा है। र्सिफ लाईन (कारोबार) सही पकडा इसें ही उसकी समजदारी। यह समजदारी हर पालक नेे दिखाई तो  पैसा, श्रम, वक्त इनकी बचत हो  सकती है। किंतु सही मसला कौन देता है? उसका जबाब हस्तसाुद्रिक शास्त्राद्वारा व्यवसाय मार्गदर्शन के  लिए, शिक्षा के  लिएभरोसेमंद  साबीत हो  सकता है। यह अनेक उदाहरणद्वारा ध्यान मे आता है। आयु में आगे घटने वाली अनुचित घटना की सूचना हाथोके  परीक्षणद्वारा, कालनिर्णयद्वारा मिलती है। किंतु इसका उपय¨ग करना उस व्यक्तीपर आधारीत है।
  • नमुना हाथ का परिक्षण (साथ के  ठप्पे का)

  • 1) हाथोके  उपर के  सभी पर्बत अच्छीतरह विकसीत, कार्यसिद्धी एवंम इच्छापूर्ती, रवी की उँगली व करंगली में अंतर तथा कृतीशीलता दर्शाती है। इसका अर्थ मन में चल रहे विचार वास्तव में लाने की कार्यक्षता, हाथो पर  दो  भाग्य रेखा, उत्पन्न की दो  साधन, गुरू के  पर्बत से शुरू होने वाली आयु रेखा अति महतत्व वाकांक्षी स्वभाव, हाथ पर बडी रवी रेखा पैसा, यश एवमं किर्ती, गुरू पर्बतपर क्रास आने वाली का बाधा हल, सुखी वैवाहिक जीवन, श्रींमत विवाह.

    2) ऊम्र के  20, 21 भाग्यरेखा की शुरूआत खुद के  पैर पर खडा, ऊम्र के  22, 23, 24 उन्नती का काल, ऊम्र के  24, 25 धंदे में प्रवेश, खुद का धंदा होगा।

    3) ऊम्र के  26, 27, 29 भारी उन्नती का वक्त। ऊम्र के  26, 27 विवाहयोगी  विवाह के  अधिक उन्नती होगी।
    4) ऊम्र के  29, 30 जीवन सफलतापूर्वक बदलाव आयेेगा। भाग्योदय  होगा। 
  • 5)  ऊम्र के  31, 32 से 37 तक रफ्तार से उन्नती ह¨गी स्थावर मालमत्ता  बनाने का योग आयेगा, आर्थिक सुबाता  आयेगी।

  • 6) ऊम्र के  37, 38 दुजे धंदे में प्रवेश होगा । ऊम्र के  38, 39 बौद्धिक   गलत अंदाज से पूरक व्यवसाय में संभवतः नुकसहोगाोगा। धन का नुकसान होगा। ऊम्र के  30, 41 से 32 तक संमिश्र कालखंड रहेगा।
  • 7) ऊम्र के  44, 45 भाग्यदोय   की शुरुआत होगी । ऊम्र के  46, 47 से 54 तक जीवन का सुवर्ण काल रहेगा। धनलाभ का बडा लाभ होगा । ऊम्र के  57, 58 से आगे का जीवन सुखी, समाधानी होगा । यह लडका सन 2009 में मेरे पास आया था। 9 वी उत्तीर्ण  था। उसके  पिताजी ने मैने बताया उसी तरह के  निर्णय लिए। आज की तारीख में इस लडके  का पिंपरी -चिंचवड में फ़ोर व्हिलर वाहन का गॅरेज है।
सफल राजनितिज्ञ का हाथ
  • 1) हाथपर दो  भाग्यरेखाएँ हैं। एक भाग्य रेखा का ऊद्ग्म आयुष्य रेखासे; तथा दुसरी भाग्य रेखा का ऊद्गम चंद्र के  टीलेसे हुआ हैं। आयुष्य रेखोंसे निकली भाग्य रेखा का अर्थ ऐसी रेखा स्वकश्टार्जित सफलता दर्शाति हैं। किन्तु इस सफलता के  पारिवारिक स्थिती भी सहायक होती हैं। ऐसी व्यक्ती नियमित मेहनत एवम् प्रयास करणेवाली होती हैं। चंद्र के  टीलेसे शुरू होणेवाली भाग्य रेखा का अर्थ, ऐसी व्यक्तिकों  विरूद्ध लिंग के  व्यक्तीसे सहायता मिलकर ऊसका जीवन सुखी होता है । संक्षेपमें, ऐसी व्यक्ती की सफलता दूसरोकि  सहायतापर निर्भर करती हैं।

    2) हाथपर बडी और सिधी रवी रेखाहोने के  कारण इस व्यक्ती की अभिरूची ऊच्च श्रेणी की हैं। इस व्यक्तीमें विभिन्न श्रेत्रौ  ऊच्च स्तरपर काम करनें का 
    हौसला हैं। इस रेखा के  कारण इस व्यक्तीके  जीवनमें नाम और पैसा आसानीसे मिलता हैं.

    3) गुरू का टीला ऊठावदार होनेंसे धार्मिक वृत्ति साथही अधिकारपद प्राप्त होता हैं। गुरू के  टीलेपर क्रास का चिन्ह और अंगुठेके  प्रथम हिस्सेें ‘यव’ चिन्ह सुखी पारिवारिक जीवन दर्शाता हैं।

    4) मस्तक रेखासे निकली हुई एक शाखा हृदय रेखा की ओर, किसी एक खास व्यक्तीमें आत्मियता दर्शाती हैं।

  • 5) आयुष्य रेखासे निकलनेवाली यात्रा रेखा के  अन्तमें क्रास का चिन्ह, इसका अर्थ सफर के दौरान  दुर्घटना होकर, पाणीमें डुबनेंसे अथवा जलोदर बिमारीसे मृत्यूु।

  • 6) 23 साल की ऊम्रमें भाग्यरेखा का प्रारंभ। स्वयं के पैरोपर खडे होनेंका योग। कतृत्व का प्रारंभ।

  • 7) 25 साल की ऊम्रमें जीवनें बदलाव दर्शाता हैं। इसी का अर्थ विवाह योग ,विवाहोपरान्त भाग्योदय  दर्शाता हैं।

  • 8) 26 साल की ऊम्रमें भाग्योदय   होगा। इसी साल यह व्यक्ती पीडब्ल्यूडी विभागमें अभियंता के  रूप में कार्यरत हुई।

  • 9) उम्र के 27, 28, 29, 30, 31 साल आर्थिक प्रगतिका काल। स्वयं का मकान होने का योग । साथही स्थायीमालमत्ता का योग । 31 साल की ऊम्र में नौकरी से इस्तीफा ।

  • 10) उम्र  के 33, 34, 35 उत्तम  भाग्य काल, डबल धंदे से उन्नती।

  • 11) उम्र  के  39, 40, 41 42, 43 असामान्य सफलता। उम्र  के  44, 45, 46 जबरदस्त लोकप्रियता (इसी काल में विधानसभा सदस्य) उम्र  के  47, 48, 49 50 सुवर्णकाल।.

  • 12) उम्र  के 51 अचानक बडा पदभार मिलेगा। यश, वैभव, साज में मान-सन्मान रहेगा। उम्र के  52, 53, 54, 55 से आगे का जीवन सुखी तथा सफल जीवन रहेगा।

  • 13)  उम्र के 27, 28, 29, 30, 31 साल आर्थिक प्रगतिका काल। स्वयं का मकान होने का योग । साथही स्थायीमालमत्ता का योग । 31 साल की ऊम्र में नौकरी से इस्तीफा ।
  • (यह व्यक्ती आज महाराश्ट्र सरकार में कॅबिनेेट मंत्री के  पद पर विराजान है। इससे भी बडा पद इन्हे मिलेगा ऐरा मेरा दावा है।
‘शिक्षा के बिना माति खोयी’
  • ‘शिक्षा के बिना माति खोयी’ ऐसा ज्योतिबा फुले इन्होने  कहते हुए अज्ञान से होनेवाले अनर्थ लोगोको  सामने बताए। स्वतः शिक्षा का प्रचार किया। पत्नी सावित्रीबाई इनको पढाकर भारत में लडकींयोके  लिए पहला स्कूल शुरू किया। इसके  अनेक लोगो के  शाप भी इन्होने   खाए। कालोघात आज उच्चतम शिक्षा के लिए सभी की भागदौड़  शुरू है । अज्ञानी पालक भी बच्चोके  पढाकर बडा बनाने का सपना देखते है। फिर भी उच्च शिक्षा का योग  कितने लोगो का आता है। प्रतिकूल परिस्थिती होते  हुए भी कुछ अत्युच्च शिक्षा प्राप्त करते है इसके उलट सभी प्रकारची अनुकुलता होती है हुए भी कई की शिक्षा में बिल्कुल बढ़ोत्तरी  नही होती है ऐसा क्यों ? शिक्षा और पैसा, प्रसिद्धी ऐसी समीकरण मजाकी होती  है। एक मेकॅनिक बोहत  पैसा कमाता है, तभी उच्च शिक्षा प्राप्त किया हुआ वकील को  मख्खीयाँ मारने का वक्त आता है । एक उदाहरण के तौर  पर विलास मोघे  (नाम बदला हुआ) सामान्य घर में पैदा हुआ हुशार विद्यार्थी के तौर  पर प्राथमिक स्कूल से पहचाना जाता है। अनेक शैक्षणिक प्रतियोगिता  में सफल रहकर स्कूल का नाम बढाता चला था। हुशार होकर भी एक शैक्षणिक साल में अपना आत्मविश्वास खो  बैठा और ऐन वक्त पर अपने रथ का पहियाँ जमीन गये कर्ण जैसा परीक्षा में उसको  विस्मरण का झटका आने लगा। हाथो पर बनी मस्तक रेखा मे आए दोषके  कारण बौद्धीक विकास बैठ गया। फीर भी वह प्रतिकूल वक्त बितने के  बाद पढाई छोडकर वह कारोबार में लग गया और देखते ही देखते ज्यादा सफल रहा। आज उसके  नाम के  सामने डिग्री की कोई लाईन नही बल्की अलिशान गाडीयो की लाईन उसके  बंगले के  सामने लगी हुई है। इसके  विरुद्ध चंद्रकांत (नाम बदला हुआ) उद्योगपति का   लडका, माता सुशिक्षित, बुद्धीमान, उच्चतम स्कूल, क्लास, निजी शिक्षा के कमी न हो  इसलिए माता पिताने विशेषतः माँ आँख में तेल डालकर उसके  शिक्षा और आहार की ओर ज्यादा ध्यान देने लगी। इस माँ की मनःस्थिती का फायदा चंद्रकांतने लिया। अपना पॉकटनी बढा लिया। पैसो  की सवाल नही था फीर भी तारीफ के  बदले चाहीए वो  वह माँगता हुआ बेभान हुआ। स्कूल के साथ ही उसका बर्ताव भी बदला. ‘11वी कक्षा क¨ वेस्ट इयर’कहते तो  चैनबाजी करने लगा। मातापिता को  फँसाने के  लिए नये नये तरीके  को  ढुँढने लगा। शराब, गुटका इसकी लत लग गई। एखादबार पिताजी के  सामने सच्चाई सामने आने बात हुई तो  माँ के  पिछे छिपने की तरकीब पर अंमल करता। इसके साथ पढाई में वह पिछे रहने लगा। उसकी माँ उसको  मेरे पास लेकर आयी। मैने उसका हाथ देखा तो उसका अधोगति  का स्पष्ट  दिखाई दिया। आज चंद्रकांत की पढाई पात्रता बारहवी फेल ऐसी है।
  • नमुना हाथ का परिक्षण (साथ के  ठप्पे का)
  • 1) हृदय रेखा और मस्तक रेखा मिलाके  एक ही आडी रेखा इसका अर्थ बुद्धी, तर्क और भावना इनको  दुविधा में फँसना । हाथ के  निचे एक निचे एक दुहेरी मस्तक रेखा मिलाके  सिमीयन रेखा दुटप्पी वृत्ति . हाथोंपर दो शुक्र कंकण लगी हुवी गलत आदत, गुटखा खाना, मदिरापान और अस्वस्थ प्रकृती, वासना रेखा मदिरा पान और गुटखा इनके  जैसे नशिले पदार्थ का  सेवन करने की प्रवृत्ति  इसके  अलावा कामवासना में हुई बेशुमार बढ़ोत्तरी दर्शती है। आयुष्य रेखा उसकी राहपर चलते उसपर एक आडी रेखा दिखाई देती है और उसका द्विभाजन होता  है, इसलिए आयु को धोका  तैय्यार होता  है।

    2) ऊम्र  के  16, 17 से 20 वा साल ज्यादातर खराब कालखंड, शिक्षा में रुकावटे, व्यसनाधिनता

    3) ऊम्र के 21, 22, 23, 24 शिक्षा का काल दर्शता है किंतुउसे रुकावटे दर्शाती है, सामान्य ऐसा कालखंड दर्शाता है।

    4) ऊम्र के 25, 26 खुद के  पैर पर खडे होने का योग. ऊम्र के  27, 28, 29, 30 आर्थिक उन्नती लेकीन धीमी गतीसे।
     
  • 5) ऊम्र के 31, 31।। भाग्योदय होगा, कारोबार में सफलता दर्शाती है। ऊम्र के  32, 33, 34, 35 अधिकतम सफलता का काल होगा।
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  • 6) ऊम्र के  38।।, 39 आर्थिक नुकसान होगा , बौद्धीक गलत अंदाज से संभवतःनुकसान। (भाग्य रेखा मस्तक रेखापर आकर रुकती हुई) नुकसान ज्यादातर 
    होगा इसलिए नुकसान 40, 41, 42 से लेकर 46 तक का काल आर्थिक संघर्षपूर्ण होगा। लते फीर आयेगी।

  • 7) ऊम्र के 46।।, 47 धंदे में बदलाव दर्शाता है। ऊम्र के  48, 49, 50 आर्थिक स्तर गाडी फीर से पटरी पे आयेगी। ऊम्र के  51, 52 को  फिर से आर्थिक गाडी लाईन पे आकर प्रगती की शुरूवात। ऊम्र के  53, 54, 55 से आगे का जीवन स्थिर होगा।

  • [  ऊपर के  हाथ का प्रिंट  चंद्रकांत के  हाथ का है। उसकी माँ को  समय परही सावध होने के  कारण चंद्रकांत बच गया किंतु उसकी आयु का बडा नुकसान होने वाला था वह हुआ। जो  चंद्रकांत बडा उद्योगपति  या बडा अधिकारी बनने वाला था आज वह र्सिफ खा-पी के  सुखी है। उपर का भविष्य कथन यह खुद की बढाई मारने के  लिए नही बल्की वह हस्तसाुद्रिक शास्त्र का गौरव  है ऐसा पाठक सझे, यह बिनती है । ]
खूनी आदमी का हाथ
  • 1) अंगुठे का अग्र गदा जैसा गोल और अंगुठे के  जोड सख्त है। ऐस आदमी क्रोध  मे अच्छे-बुरा की सोच नही रखता। ऐसे लोग हिंसक प्रवृत्ति  के होते है। हटवादी कहे जाते है। क्रोध   में जोश में आकार खून जैसे भयानक गुनाह कर सकते है।

    2) गुरू के  पर्बत का उपर की बाजू से आयुष्य रेखा शुरू होती है। इसका अर्थ ऐसे आदमी में क्रूरता भरी होती है।
    3) हृदय रेखा और मस्तक रेखा एक ही आडी रेखा उसको सिमियन रेखा ऐसा कहा जाता है। इसका अर्थ बुद्धी, तर्क और भावना यह उलझन फँसे लगते है और चालचलन में चत्कारीपन दिखाई देता है।

    4) हाथोंपर दो  भाग्यदेखाएँ है। इसका अर्थ दो  धंदे   से प्रगती होगी, किंतु इन दो  भाग्य रेखा का अंत मस्तकरेखापर हुआ है इसलिए मुर्खता से आयु का नुकसान होता है।

  • 5) हाथो पर शुक्रकंकण, बहुत  सारे व्यसन, लत, आदत और अस्वस्थ प्रकृती दर्शाती है।
  • शनीके  पर्बतपर क्रास चा चिन्ह फाँसी या खून दर्शाती है। यह व्यक्ती मेरे पास 2005 साल में आयी थी। दोहरे धंद¨ से अच्छी उन्नती दिखाई दी। ऊम्र के  32, 33, 34, 35 उनके  आयु का सुवर्णकाल था। ऊम्र के  साढे 35 उम्र के  उनका तलाक हुआ। इन महाशय को क्रोध  पर नियंत्रण करने की सलाह दी गई थी; किंतु ऊम्र के  36 वे साल में इन व्यक्ती के  हाथ से खून हुआ। आज के वक्त यह व्यक्ती उमरकैद की सजा भुगत रही है। आगे इस व्यक्ती का खून हो  सकता है या फाँसी की  सजा हो  सकती है, ऐसा मेरा दावा है।
एक जानेमानी, सफल सिनेतारका का हाथ
  • 1) आयुष्य रेखा और मस्तक रेखा अंतर दिखाई देता है। इसका अर्थ आत्मविश्वास, बेकाबू स्वतंत्रता, विरुद्धी लिंगी दोस्त बनाने की ओर ओढ, दुसरो के दोष पर ज्यादा ध्यान ।
    2) गुरू के पर्बतपर बने क्रास के चिन्ह द्वारा महत्वाकांक्षा की पूर्ती।
    3) मस्तक रेखा गुरू के पर्बत पर शुरू होती है और यह रेखा सीधी जाती हुई है इसलिए उसकी बुद्धीमत्ता और सयानापन दिखाई देता है।
    4) रवी रेखा का उगम चंद्र के पर्बतपर होता है। इसलिए जबरदस्त लोकप्रियता मिलती है।
  • 5) रवी रेखापर पर्बत के निचे नक्षत्र चिन्ह है। इसलिए मान एवं सन्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।
  • 6) विवाह रेखा अंत में दो मुँही होती है इसलिए पती-पत्नी में विरह, तलाक दर्शता है।
  • 7) दोनों हाथो पर चार-पाच विवाह रेखाँए इसका अर्थ बहोतही प्रेम प्रकरण या शरीरसंबंध।
  • 8) मस्तक रेखा से निकला एक भाग हृदय रेखा की ओर कीसी एक व्यक्ती के लिए आत्मीयता दर्शाती है।
  • 9) ऊम्र के 20 वे साल में भाग्य रेखा का उगम होता है। इसका अर्थ कमाई की शुरूआत होगी।
  • 10) ऊम्र के 23 भाग्योदय होगा । ऊम्र के 24, 25, 26, 27, 28, 29, 30 जबरदस्त रफ्तार से उन्नती होगी। समाज में मानसन्मान बढेगा।
  • 11) ऊम्र के 31 विवाह योग्य दर्शता है। ऊम्र के 32, 33, 34 का क्लेशदायक कालखंड दर्शाता है। ऊम्र के 35, 36 कोर्ट -कचेरी का प्रसंग, अपकिर्ती, तलाक आदी घटनाएँ दर्शाती है।
  • 12) ऊम्र के 37 मे भाग्योदय की शुरूआत होगी ऊम्र के 38, 39, 40, 41 से आगे का सुखी जीवनहोगा । बहोतसारा पैसा मिलेगा। यश और लोकप्रियता मिलेगी। विवाह सौख्य नही। आयु में अलग अलग व्यक्ती आयेंगे, किंतु सुख मिलेगा नही। (यह सिने तारका हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में नंबर एक की हिर¨ईन पहचानी जाती है। महिना-दो महिनो में कमसे कम एक प्रेमसंबध का अफेयर की चर्चा होती है। आज उसकी उम्र 27 है । आगे का भविष्य मैने बताया हुए तरीके से घटीत होगा ऐसा मेरा दावा है।)
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